SCO राष्ट्रों की बैठक चीन में

चीन में हो रहे इस SCO शिखर सम्मेलन में प्रमुख रूप से चीन, भारत, रूस, पाकिस्तान, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, बेलारूस के राष्ट्राध्यक्ष/प्रधानमंत्री और 20 से अधिक देशों के नेता शामिल हैं। ये सभी नेता वैश्विक और क्षेत्रीय सहयोग पर चर्चा कर रहे हैं.
एससीओ शिखर सम्मेलन 2025:
- यह सम्मेलन 31 अगस्त से 1 सितंबर तक चीन के तियानजिन शहर में आयोजित किया गया है।
- इसमें चीन, भारत, रूस समेत कुल 10 सदस्य राष्ट्र, 2 पर्यवेक्षक राज्य, और 14 संवाददाता साझेदार भाग ले रहे हैं।
- एससीओ देशों के नेता, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग शामिल हैं, इस मंच पर वैश्विक मुद्दों, सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर चर्चा करते हैं।
- यह 24 साल पुराना संगठन एशिया, यूरोप और अफ्रीका के अनेक देशों के बीच सहयोग का एक बड़ा मंच है।
- इस साल का शिखर सम्मेलन एससीओ की स्थापना के बाद का सबसे बड़ा सम्मेलन होगा, जिसमें राजनीतिक और आर्थिक दस्तावेजों को अपनाया जाएगा और यूरोएशियाई संपर्क और सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक रणनीतिक नीतियाँ तय होंगी।
एससीओ शिखर सम्मेलन के सदस्य देशों में प्रमुखतः शामिल हैं:
एससीओ (शंघाई सहयोग संगठन) के 2025 के शिखर सम्मेलन में निम्नलिखित देशों के नेता चीन के तियानजिन में मिल रहे हैं:
तियानजिन में हुए 2025 के शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट में निम्नलिखित स्थायी सदस्य देशों के नेता शामिल हुए:
- चीन – राष्ट्रपति शी जिनपिंग
- रूस – राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन
- भारत – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- पाकिस्तान – प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ
- कजाकिस्तान – राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट तोकायेव
- किर्गिस्तान – राष्ट्रपति सदिर जापारोव
- ताजिकिस्तान – राष्ट्रपति इमोमाली रहमोन
- उज्बेकिस्तान – राष्ट्रपति शावकत मिर्ज़िओयेव
- ईरान – राष्ट्रपति मसूद पेजेशकिया
- बेलारूस – राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको
ये 10 देश एससीओ के स्थायी (पूर्ण) सदस्य हैं और सभी के राष्ट्राध्यक्ष या प्रधानमंत्री इस समिट में शामिल होकर बैठकों और चर्चा में भाग लेकर वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, तथा अन्य रणनीतिक मुद्दों पर निर्णय लिए गए।
साथ ही इस समिट में कुछ पर्यवेक्षक और संवाद साझीदार देश भी शामिल हुए, लेकिन स्थायी सदस्यता वाले ये 10 देश ही मुख्य सहभागी थे। यह बैठक चीन के मेजबानी में हुई और चीन इस समय एससीओ का अध्यक्ष भी है।
इसके अलावा नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली और मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू भी इस सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। कुल मिलाकर 20 से अधिक देशों के नेता और 10 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख इस शिखर सम्मेलन में भाग ले रहे हैं।
यह सम्मेलन चीन की मेजबानी में 31 अगस्त से 1 सितंबर 2025 तक तियानजिन में हो रहा है और इस बार का सम्मेलन एससीओ का अब तक का सबसे बड़ा शिखर सम्मेलन माना जा रहा है। इसमें भारत, चीन, रूस के अलावा एशिया, मध्य एशिया और यूरोप के सदस्य और पर्यवेक्षक देश शामिल होकर वैश्विक सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था पर चर्चा कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति शी जिनपिंग और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय और त्रिपक्षीय मुलाकातें भी हो रही हैं, जो 2020 के बाद पहली बार भारत-चीन के रिश्तों में नरमी का संकेत देती हैं। इस शिखर सम्मेलन का रणनीतिक महत्व अमेरिका के साथ जारी व्यापार विवादों, भूराजनीतिक तनावों और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच बढ़ गया है।
संक्षेप में, चीन में हो रहे इस SCO शिखर सम्मेलन में प्रमुख रूप से चीन, भारत, रूस, पाकिस्तान, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, बेलारूस के राष्ट्राध्यक्ष/प्रधानमंत्री और 20 से अधिक देशों के नेता शामिल हैं। ये सभी नेता वैश्विक और क्षेत्रीय सहयोग पर चर्चा कर रहे हैं.
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की स्थापना
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की स्थापना 15 जून 2001 को चीन के शंघाई शहर में की गई थी। इसे शुरू में “शंघाई पाँच” के नाम से जाना जाता था, जिसमें चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, और ताजिकिस्तान शामिल थे। बाद में उज्बेकिस्तान के शामिल होने के साथ ही इस संगठन का नाम शंघाई सहयोग संगठन कर दिया गया।
SCO का प्रमुख उद्देश्य यूरेशिया क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखना है। इसके तहत आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद जैसे खतरों से निपटना, क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना, आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करना, और विभिन्न सभ्यताओं के बीच संवाद व सहयोग को बढ़ावा देना शामिल है। यह संगठन बहुपक्षीय कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने के लिए काम करता है।
इसके अलावा, SCO अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करते हुए सदस्यों के बीच आपसी विश्वास, सम्मान, बराबरी और फायदेमंद साझेदारी स्थापित करने का लक्ष्य रखता है। संगठन मध्य एशिया क्षेत्र में पारंपरिक और गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों से निपटने की एक सक्रिय भूमिका निभाता है।
भारत शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का पूर्ण सदस्य
भारत शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का पूर्ण सदस्य 9 जून 2017 को बना। इससे पहले भारत को 2005 में एससीओ में पर्यवेक्षक (Observer) का दर्जा मिला था। भारत और पाकिस्तान को 2017 में कजाकिस्तान के अस्ताना में आयोजित ऐतिहासिक SCO शिखर सम्मेलन में पूरी सदस्यता दी गई थी। इसके बाद से भारत सक्रिय रूप से इस संगठन के सभी मंचों पर भाग ले रहा है और क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग व अन्य बहुपक्षीय मुद्दों पर योगदान दे रहा है।
भारत ने एससीओ में पर्यवेक्षक के रूप में 2005 में प्रवेश किया, जबकि पूर्ण सदस्यता 2017 में हासिल की गई.
