08/02/2026

भारत में शाकाहारी- मांसाहारी भोजन in India vegetarian- non-vegetarian diet

भारत में शाकाहारी और मांसाहारी खाने वालों की संख्या राज्य के अनुसार बहुत अलग है। कुछ राज्यों में अधिकतर लोग शाकाहारी भोजन खाते हैं, तो वहीं कई राज्यों में मांसाहारी भोजन प्रचलित है। यहां राज्यवार आंकड़ों और विविध सांस्कृतिक कारणों का विस्तृत वर्णन है.

भारत में शाकाहारी राज्यों का प्रतिशत

  • राजस्थान: यहां लगभग 75-80% लोग शाकाहारी भोजन करते हैं। धार्मिक परंपराएं जैसे जैन और वैष्णव संस्कृति, इन आंकड़ों को सबसे ऊपर रखते हैं.
  • हरियाणा: लगभग 69.2-80% आबादी शाकाहारी है, कृषि व वैदिक संस्कृति के कारण.
  • गुजरात: यहां 62.4% लोग शाकाहार पसंद करते हैं। जैन धर्म का गहरा प्रभाव भी यहां है.
  • पंजाब: यहां शाकाहारी आबादी करीब 66.7% है, जबकि मांसाहारी भी बहुत मिलते हैं.
  • मध्य प्रदेश: करीब 47% आबादी शाकाहारी है, शेष मांसाहारी.
  • हिमाचल प्रदेश: लगभग 53% लोग शाकाहारी हैं.
  • उत्तर प्रदेश: करीब 42-51% शाकाहारी जनसंख्या है। यहां दोनों प्रकार के भोजन प्रचलित हैं.

शाकाहारी भोजन की विशेषताएं

राजस्थान, गुजरात, पंजाब, हरियाणा में दाल, चावल, रोटी, सब्जियां, दूध, दही, घी, और बाजरे जैसे खाद्य पदार्थ मुख्य रूप से खाए जाते हैं. राजस्थान में दाल-बाटी-चurma, पंजाब में मक्की दी रोटी-सारसों दा साग खूब पसंद किए जाते हैं.

भारत में मांसाहारी राज्यों का प्रतिशत

  • नागालैंड: देश में सबसे ज्यादा, 99.8% लोग मांसाहारी हैं.
  • पश्चिम बंगाल: लगभग 99.3% लोग मांस खाते हैं, विशेष रूप से मछली और झींगा.
  • केरल99.1% जनसंख्या मांसाहारी है; यहां समुद्री भोजन बेहद लोकप्रिय है.
  • आंध्र प्रदेश98.25% आबादी मांसाहारी है, चिकन, मछली, अंडा, बिरयानी आदि मुख्य भोजन है.
  • तेलंगाना: करीब 97.3% लोग नियमित तौर पर मांसाहारी भोजन करते हैं.
  • तमिलनाडु: लगभग 97.65% मांसाहारी आबादी है.
  • असम80% से ज्यादा लोग मांसाहारी हैं, विशेष तौर पर मछली खाते हैं.
  • गोवा, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश: इन राज्यों का भी मांसाहारी प्रतिशत 90% से ज्यादा है.

मांसाहारी भोजन की विशेषताएं

इन राज्यों में मछली, चिकन, मटन, अंडा, झींगा और समुद्री खाद्य पदार्थ आम भोजन हैं। बंगाल में मछली, केरल में सी-फूड, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में बिरयानी तथा मसालेदार चिकन बेहद लोकप्रिय है.

भारत में धर्म, संस्कृति और क्षेत्रवार अंतर

  • हिंदू आबादी में 52% पुरुष व 41% महिलाएं कभी-कभी मांस खाती हैं, जबकि ईसाई और मुस्लिम समुदायों में यह प्रतिशत 70% से अधिक है.
  • शहरी क्षेत्रों में मांसाहारी भोजन का प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों से ज्यादा है.
  • उत्तर भारतीय राज्यों में शाकाहार अधिक, दक्षिण व पूर्वी भारत में मांसाहार ज्यादा देखा जाता है.

राज्य अनुसार प्रतिशत सारणी

राज्यशाकाहारी (%)मांसाहारी (%)
राजस्थान75-8020-25
हरियाणा69-8020-31
गुजरात62-6337-38
पंजाब66.733.3
हिमाचल प्रदेश5347
मध्य प्रदेश4753
उत्तर प्रदेश42-5149-58
नागालैंड<199.8
पश्चिम बंगाल<199.3
केरल<199.1
आंध्र प्रदेश<298.3
तमिलनाडु<397.65
तेलंगाना2.797.3
असम2080

शाकाहारी भोजन और सात्विक गुण का संबंध

शाकाहारी भोजन और सात्विक गुण का संबंध बहुत गहरा है। सात्विक भोजन मुख्यतः शुद्ध शाकाहारी सामग्री से बनता है, जो मन, शरीर और आत्मा की शुद्धता और संतुलन बनाए रखने में मदद करता है.

शाकाहारी भोजन और सात्विकता का संबंध

  • शाकाहारी भोजन में ताजे फल, सब्जियां, अनाज, दालें, दूध, और उससे बने पदार्थ शामिल होते हैं, जिन्हें सात्विक माना जाता है.
  • आयुर्वेद और योग में भोजन को तीन श्रेणियों में बांटा गया है – सात्विक, राजसिक, तामसिक। सात्विक भोजन मानव के चित्त को शांत, शुद्ध और सकारात्मक बनाने में सहायक होता है.
  • सात्विक भोजन में मांस, मछली, अंडा, बासी या बहुत मसालेदार, प्रसंस्कृत, और शराब-जैसे तामसिक चीजें नहीं होतीं.
  • सात्विकता का मूल तत्व “पवित्रता, संतुलन, सामंजस्य और आत्मनियंत्रण” है। इसे पाने में शाकाहारी भोजन सबसे उपयुक्त है.

सात्विक भोजन के लाभ

  • मानसिक स्वास्थ्य: सात्विक भोजन से मन शांत, एकाग्र और सकारात्मक रहता है। ध्यान, योग और आध्यात्मिक साधना में यह सहायक है.
  • शारीरिक शुद्धता: शुद्घ शाकाहारी भोजन शरीर को स्वच्छ, विषरहित और ऊर्जावान बनाता है। रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है.
  • आध्यात्मिक लाभ: कई योगी, साधु, एवं धार्मिक व्यक्ति सात्विक शाकाहारी भोजन ग्रहण करते हैं ताकि उनकी आत्मा और चेतना शुद्ध रहें.
  • पाचन तंत्र: सात्विक भोजन हल्का और आसानी से पचने वाला होता है, जिससे पेट और पाचन तंत्र बेहतर रहता है.
  • मूल्य और नैतिकता: मांसाहार में हिंसा और क्रूरता का भाव रहता है, जबकि शाकाहार और सात्विक जीवन में अहिंसा और करुणा का भाव होता है.
  • पर्यावरणीय लाभ: शाकाहारी भोजन से संसाधनों की बचत, जलवायु संरक्षण और पर्यावरण का संतुलन बनता है, क्योंकि इसमें अधिक भूमि, जल, और ऊर्जा का उपभोग नहीं होता.

शाकाहारी भोजन न केवल शारीरिक स्वास्थ्य में मददगार है, बल्कि मानसिक, सामाजिक और पर्यावरणीय संतुलन, आध्यात्मिक उन्नति, तथा नैतिकता को भी बढ़ावा देता है। आज के समय में सात्विक शाकाहार को अपनाना एक ज्ञानपूर्ण, संतुलित और जिम्मेदार विकल्प है.

मांसाहारी व तामसिक भोजन के फायदे – नुकसान

मांसाहारी भोजन (अर्थात मांस, मछली, अंडा, तथा अधिक बासी या मसालेदार भोजन) को तामसिक गुणों का संवाहक माना गया है। इससे न केवल शरीर बल्कि मन और चरित्र पर भी प्रभाव पड़ता है.

मांसाहारी भोजन के स्त्रोत और तामसिक गुण का संबंध

  • मांसाहारी भोजन यानी मांस, मछली, अंडा, अल्कोहल, पुनः गरम किया या बासी खान-पान, प्याज, लहसुन – ये सभी तामसिक श्रेणी में आते हैं.
  • तामसिक भोजन शरीर को भारी, आलसी, सुस्त, मानसिक अराजकता और अत्यधिक इच्छाओं से भर देता है.
  • तामसिक आहार से आत्म-नियंत्रण कमजोर पड़ता है, काम और क्रोध जैसी प्रवृत्तियां बढ़ती हैं, और चेतना मंद पड़ती है.
  • भारतीय योग, आयुर्वेद और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार तामसिक भोजन से बुद्धि और व्यवहार तामसिक यानी नकारात्मक, असंयमी और आलसी हो जाते हैं.

मांसाहारी व तामसिक भोजन के नुकसान

  • मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव – चिड़चिड़ापन, क्रोध, अवसाद, असंयम, आलस्य, काम प्रवृत्ति में वृद्धि.
  • शारीरिक नुकसान – हृदय, फेफड़े, लीवर पर बुरा असर, हाई ब्लडप्रेशर, हार्ट अटैक, कैंसर, मोटापा, मधुमेह जैसी बीमारियां बढ़ाती हैं.
  • पाचन कमजोर होता है, शरीर में सुस्ती और भारीपन रहता है.
  • सामाजिक व नैतिक क्षति – तामसिक भोजन क्रूरता, अतृप्ति, स्वार्थ, लालच व राग-द्वेष की वृत्तियों को बढ़ाता है.
  • आयुर्वेद और योग के अनुसार, तामसिक भोजन से आत्मा और चित्त शुद्ध नहीं रह पाता.

कुछ फायदे

  • तेज ऊर्जा और प्रोटीन की प्राप्ति – मांस, अंडा आदि से तत्काल शक्ति मिलती है.
  • कुछ शारीरिक परिश्रम करने वालों को संपूर्ण प्रोटीन मिलता है.
  • मिनरल्स एवं विटामिन्स जैसे B12 प्राप्त होते हैं, जो शुद्ध शाकाहारियों को सीमित मात्रा में मिलते हैं.

मांसाहारी और तामसिक भोजन का अधिक सेवन न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक है; यह मनुष्य के अंदर तमोगुण को बढ़ाकर उसे सुस्त, असंयमी और नकारात्मक बना सकता है. हालांकि प्रोटीन, विटामिन या उच्च ऊर्जा आवश्यकता के कारण सीमित मात्रा में लेने से लाभ मिल सकता है, लेकिन संयम आवश्यक है और मानसिक-आध्यात्मिक विकास के लिए तामसिक भोजन का त्याग करने की सलाह दी जाती है.

भारत में शाकाहार और मांसाहार राज्य के अनुसार विविधता लिए हुए है। राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, गुजरात आदि राज्यों में शाकाहारी भोजन का बोलबाला है। वहीं नागालैंड, पश्चिम बंगाल, केरल, आंध्र प्रदेश, असम जैसे राज्यों में मांसाहारी आबादी बहुत अधिक है। यह अंतर धर्म, संस्कृति, परंपरा, क्षेत्र, और जातीय विशेषताओं के कारण है।

यहां दिया गया डेटा सार्वजनिक सर्वेक्षण और सरकारी आंकड़ों के आधार पर है, जो समय-समय पर बदल सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *