भगत सिंह: क्रांतिकारी और युवाओं को प्रेरित करने वाले नेता

भारत के स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास अनगिनत बलिदानों, त्याग और संघर्षों से भरा हुआ है। गांधीजी के नेतृत्व में चले अहिंसामयी आंदोलनों के साथ-साथ क्रांतिकारी रास्ते को चुनने वाले युवाओं ने भी स्वतंत्रता प्राप्ति में अहम योगदान दिया। इन्हीं क्रांतिकारियों में सबसे अधिक लोकप्रिय और प्रेरणादायक नाम है – शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह।
भगत सिंह का व्यक्तित्व बहुआयामी था – वे सिर्फ बम और गोली के रास्ते पर चलने वाले सामान्य क्रांतिकारी नहीं थे, बल्कि गहन अध्ययन करने वाले, समाज से गहराई से जुड़े हुए, और युवाओं को नई चेतना देने वाले सच्चे चिंतक एवं लेखक भी थे। आजादी के लगभग सौ साल बाद भी वे युवाओं के दिलों में ऊर्जा, साहस और उत्साह भरते हैं।
प्रारंभिक जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि
- जन्म: 28 सितम्बर 1907, लायलपुर जिले के बंगा गांव (अब पाकिस्तान में)
- परिवार: पंजाब का यह परिवार राष्ट्रभक्ति की भावना से परिपूर्ण था। उनके पिता किशन सिंह, चाचा अजित सिंह और स्वर्ण सिंह अंग्रेजी शासन के विरोध में सक्रिय रहते थे।
- प्रारंभिक शिक्षा ने उनके भीतर राष्ट्रप्रेम और विद्रोह की चिंगारी जगाई।
- प्रारंभिक सक्रियता और संगठनों से जुड़ाव
- भगत सिंह ने 1923 में लाहौर के नेशनल कॉलेज में प्रवेश लेकर राजनीतिक सक्रियता शुरू की।
- वे स्वदेशी शिक्षा और स्वराज की भावना से प्रभावित थे। 1924 में वे कानपुर में हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) से जुड़ गए, जिसका नेतृत्व चंद्रशेखर आजाद करते थे।
- बाद में उन्होंने और अन्य क्रांतिकारियों के साथ मिलकर इसे हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) में बदला, जिसका लक्ष्य था ब्रिटिश शासन को समाप्त कर एक समाजवादी गणराज्य स्थापित करना।
बचपन से ही उनके अंदर अंग्रेजों के अत्याचार देखकर आक्रोश उत्पन्न हुआ। जलियांवाला बाग हत्याकांड (1919) ने उनके मानस पर गहरा प्रभाव डाला। वे उस स्थान से मिट्टी लाकर सिर पर रखते और कहते कि यही वह भूमि है, जहां निर्दोष भारतीयों का खून बहा था।
शिक्षा और वैचारिक विकास
- उन्होंने लाहौर के नेशनल कॉलेज में पढ़ाई की, जिसे लाला लाजपत राय ने स्थापित किया था।
- कॉलेज में उन्होंने पश्चिमी दार्शनिकों, रूसी क्रांतिकारियों और समाजवादी नवजागरण की किताबें पढ़ीं।
- वे कार्ल मार्क्स, लेनिन, रोमान रोलां, बखुनिन जैसे चिंतकों से गहराई से प्रभावित हुए।
- उनकी पढ़ाई और लेखनी ने उन्हें केवल “हथियारों के प्रयोग” तक सीमित न रखकर एक विचारक क्रांतिकारी में बदल दिया।
स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका

भगत सिंह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे प्रभावशाली और क्रांतिकारी व्यक्तित्वों में से एक थे। उनका योगदान केवल ब्रिटिश शासन के विरुद्ध हथियार उठाने तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने एक गहरा सामाजिक, राजनीतिक और वैचारिक संदेश दिया, जो युवाओं को देश की आजादी के लिए संगठित करने और सक्रिय करने का काम करता रहा।
1 क्रांतिकारी संगठनों से जुड़ाव
भगत सिंह ने हिंदुस्तान नौजवान सभा, नौजवान भारत सभा और बाद में हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA), जिसे आगे चलकर हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) कहा गया, से सक्रिय रूप से जुड़कर युवाओं को संगठित किया।
जलियांवाला बाग हत्याकांड ने भगत सिंह के क्रांतिकारी बनने की नींव रखी। उन्होंने इसे असहनीय अत्याचार माना और इस घटना के बाद देश से ब्रिटिश शासन को हटाने की धुन में जुट गए।
2 लाला लाजपत राय की मौत और प्रतिशोध
साइमन कमीशन के विरोध के दौरान इंग्लिश पुलिस अधिकारी सॉन्डर्स की गोली लगने से लाला लाजपत राय की मौत हो गई थी। इसका बदला लेने के लिए भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव और चंद्रशेखर आजाद ने सॉन्डर्स हत्या कांड (1928) को अंजाम दिया।
3 केंद्रीय विधानसभा बमकांड (1929)
भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने दिल्ली की सेंट्रल असेंबली में बम फेंककर अंग्रेजी सत्ता को चुनौती दी। यह बम किसी जान लेने के लिए नहीं, बल्कि बहरे कानों को सुनाने के लिए था। इसके बाद उन्होंने गिरफ्तारी दी और अदालत को अपने विचार प्रचारित करने का मंच बनाया।
4. जेल जीवन और लेखन
भगत सिंह जेल में भी निरंतर लिखते और पढ़ते रहे।
- उन्होंने जेल में भूख हड़ताल की, ताकि भारतीय कैदियों को भी यूरोपीय कैदियों जैसी सुविधाएँ मिल सकें।
- वे मार्क्सवादी और क्रांतिकारी विचारधारा पर आधारित कई पुस्तकों का अध्ययन करते रहे।
- उनके लेख – मैं नास्तिक क्यों हूँ, क्रांति की जरुरत, युवाओं का कर्तव्य आदि आज भी प्रेरणा देते हैं।
5. शहादत और उसका प्रभाव
23 मार्च 1931 को लाहौर सेंट्रल जेल में भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी दी गई।
उनकी शहादत ने पूरे देश में क्रांतिकारी लहर पैदा कर दी।
लोग भगत सिंह जिंदाबाद और इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाते हुए सड़कों पर उतर आए।
6. भगत सिंह के विचार और दर्शन
क्रांति की परिभाषा
भगत सिंह ने कहा था कि क्रांति का अर्थ केवल हथियार उठाना नहीं है, बल्कि समाज के ढांचे में आमूल-चूल परिवर्तन करना है।
नास्तिकता और तर्कशील सोच
उन्होंने धर्मांधता और अंधविश्वास का विरोध किया। उन्होंने लिखा – “ईश्वर की सत्ता का प्रमाण नहीं मिलता, इसलिए मनुष्य को अपने बल और विवेक पर भरोसा करना चाहिए।”
युवाओं की भूमिका
उनके विचार में युवा वर्ग समाज को जागृत करने वाला सबसे बड़ा स्तंभ था। उन्होंने कहा कि परिवर्तन की लौ सबसे पहले युवाओं के हृदय में जगती है।
आज के युवाओं के लिए प्रेरणा
आजादी के बाद का भारत कई चुनौतियों से जूझ रहा है – भ्रष्टाचार, सामाजिक असमानता, बेरोज़गारी, जातिवाद और धार्मिक कट्टरता। भगत सिंह के विचार आज भी हमें राह दिखाते हैं।
- युवाओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
- समाज में न्याय, समानता और भाईचारा स्थापित करने का प्रयास करना चाहिए।
- केवल नौकरी प्राप्त करना ही उद्देश्य न हो, बल्कि राष्ट्रहित के लिए कुछ कर गुजरने का सपना देखना चाहिए।
भगत सिंह की लोकप्रियता और सांस्कृतिक प्रभाव
- फिल्मों, नाटकों और साहित्य में भगत सिंह को बार-बार चित्रित किया गया है।
- अनेक कवियों और लेखकों ने उनकी शहादत को शब्दों में अमर बनाया।
- वे केवल भारत ही नहीं, बल्कि विश्व भर में क्रांतिकारी युवाओं के प्रतीक बने।
- भगत सिंह केवल एक क्रांतिकारी योद्धा नहीं थे, बल्कि वे समाजवादी चिंतक, लेखक, संगठनकर्ता और सच्चे राष्ट्रभक्त थे।
- उनकी शहादत ने भारत के युवाओं को यह सिखाया कि सच्ची क्रांति विचारों से आती है, और विचार हमेशा अमर रहते हैं।
आज जब युवा पीढ़ी अक्सर भ्रमित और निराश दिखाई देती है, भगत सिंह के विचार उन्हें नयी दिशा और ऊर्जा प्रदान करते हैं।
वे हमें याद दिलाते हैं कि व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज और राष्ट्र के लिए जीना ही सच्चा जीवन है।

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