भारत रत्न भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो असाधारण सेवा या उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए विविध क्षेत्रों में प्रदान किया जाता है।

भारत रत्न का इतिहास | History of the Bharat Ratna
भारत रत्न पुरस्कार की स्थापना 2 जनवरी 1954 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा की गई थी। शुरूआत में यह सम्मान कला, साहित्य, विज्ञान और सार्वजनिक सेवा के क्षेत्र में उपलब्धियों के लिए दिया जाता था, लेकिन 2011 में श्रेणी का विस्तार कर इसे “मानव प्रयास के किसी भी क्षेत्र” के लिए मान्य कर दिया गया।
भारत रत्न के लिए आधिकारिक पात्रता मानदंड बहुत सरल व समावेशी हैं—किसी भी जाति, व्यवसाय, पद या लिंग के भेदभाव के बिना कोई भी व्यक्ति पात्र है, बशर्ते उसका योगदान “मानव प्रयास के किसी भी क्षेत्र” में असाधारण हो।
पात्रता मानदंड का विस्तार
- पुरस्कार शुरू में कला, साहित्य, विज्ञान, सार्वजनिक सेवा में दिया जाता था, लेकिन 2011 के बाद इसे “किसी भी क्षेत्र” के व्यक्ति को दिया जा सकता है, जिसमें खेल भी शामिल हैं।
- भारत रत्न के लिए कोई औपचारिक नामांकन या आवेदन प्रक्रिया नहीं है।
- यह सिर्फ भारतीय नागरिकों तक सीमित नहीं है; विदेशी नागरिक भी, जिनका योगदान भारत या मानवता के लिए उल्लेखनीय हो, पात्र हो सकते हैं।
- मरणोपरांत (After Death) भी यह सम्मान दिया जा सकता है।
- एक वर्ष में अधिकतम तीन लोगों को ही भारत रत्न प्रदान किया जा सकता है।
क्या ज़रूरी नहीं है
- उम्र, शैक्षणिक योग्यता, सरकारी नौकरी, पद, वर्ग, धर्म आदि की कोई पाबंदी नहीं है।
- इसके लिए कहीं भी आवेदन या सिफारिश भेजने की सार्वजनिक व्यवस्था नहीं है; सिफारिश केवल प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रपति को भेजी जाती है।
चयन प्रक्रिया व शर्तें
- भारत रत्न पुरस्कार के लिए कोई औपचारिक नामांकन आवश्यक नहीं है; प्रधानमंत्री इस सम्मान के लिए राष्ट्रपति को सीधी सिफारिश करते हैं।
- प्रति वर्ष अधिकतम तीन व्यक्तियों को ही यह सम्मान दिया जा सकता है।
- यह किसी भी वर्ग, व्यवसाय, पद या लिंग के व्यक्ति को दिया जा सकता है।
- शुरुआत में मरणोपरांत सम्मान का प्रावधान नहीं था, किन्तु 1955 से यह संभव हो सका है।
पुरस्कार स्वरूप एवं सुविधाएँ
भारत रत्न पुरस्कार स्वरूप की बात करें तो यह एक प्रमाणपत्र (सनद) और एक विशेष पदक के रूप में प्रदान किया जाता है, जिसमें धनराशि या अन्य लाभ नहीं मिलते।
पदक (मेडल) की विशेषताएँ
- पदक पीपल की पत्ती के आकार का होता है; यह तांबे धातु से बना होता है तथा किनारा और सूर्य का चिन्ह प्लेटिनम से बनता है।
- इसकी लंबाई लगभग 5.8 सेमी, चौड़ाई 4.7 सेमी, और मोटाई 3.1 सेमी है।
- पदक के आगे सूर्य की आकृति और नीचे हिंदी में “भारत रत्न” लिखा होता है; पीछे की ओर अशोक स्तंभ के साथ “सत्यमेव जयते” लिखा होता है।
- सेटिफिकेट (Certificate/Sanad) पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होते हैं।
सम्मान से जुड़ी सुविधाएँ
- यह पुरस्कार मात्र प्रतीकात्मक सम्मान है, इसमें कोई धनराशि, पेंशन या अन्य भौतिक लाभ नहीं दिया जाता।
- सम्मानित व्यक्ति को आधिकारिक सरकारी कार्यक्रमों एवं वरीयता क्रम (order of precedence) में विशिष्ट स्थान मिलता है।
- भारत रत्न विजेताओं को समाज में सर्वोच्च सम्मान एवं राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त होती है।
इस प्रकार, भारत रत्न सम्मान के स्वरूप में एक सुंदर पदक और सर्टिफिकेट शामिल हैं, जो देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार की गरिमा का प्रतीक हैं।
उल्लेखनीय प्राप्तकर्ता
- भारत रत्न के प्रथम तीन पुरस्कारित थे: सी. राजगोपालाचारी (राजनेता), डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन (शिक्षाविद एवं राष्ट्रपति) व डॉ. सी. वी. रमन (विज्ञानी)।
- अब तक 53 व्यक्तियों को यह पुरस्कार मिला है, जिसमें 18 मरणोपरांत सम्मान शामिल हैं।
- सबसे युवा प्राप्तकर्ता: सचिन तेंदुलकर (40 वर्ष की आयु में)।
- सबसे वृद्ध प्राप्तकर्ता: धोंडो केशव कर्वे (100 वर्ष की आयु में)।
- विदेशी पुरस्कारित: अब्दुल गफ्फार खान (पाकिस्तान) और नेल्सन मंडेला (दक्षिण अफ्रीका); तथा प्राकृतिक नागरिक मदर टेरेसा।
भारत रत्न विजेताओं की सूची

1954 से अब तक कई महान हस्तियों को यह पुरस्कार दिया गया है। इनमें प्रमुख नाम शामिल हैं:
- डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम (वैज्ञानिक एवं राष्ट्रपति), माँ टेरेसा (समाज सेविका), लता मंगेशकर (गायिका), सचिन तेंदुलकर (क्रिकेट खिलाड़ी), पं. मदन मोहन मालवीय (शिक्षाविद), प्रणब मुखर्जी (राष्ट्रपति), भूपेन हजारिका (संगीतकार), नानाजी देशमुख (समाजसेवी)।
भारत रत्न विजेताओं की सूची में 1954 से 2024 तक कुल 53 महान हस्तियों को इस सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया गया है, जिनमें कला, विज्ञान, साहित्य, राजनीति, समाजसेवा, खेल और अन्य क्षेत्रों के विशिष्ट योगदानकर्ता शामिल हैं।
प्रमुख विजेताओं की सूची (1954–2024) |

- 1954: सी. राजगोपालाचारी,
- डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, ( Politics & Statesmanship )
- डॉ. सी. वी. रमन ( Physicist, Nobel Laureate )
- 1955: भगवान दास,
- एम. विश्वेश्वरैया, ( Science & Engineering )
- पं. जवाहरलाल नेहरू ( Politics & Statesmanship )
- 1957: गोविंद बल्लभ पंत
- 1958: धोंडो केशव कर्वे
- 1961: पुरुषोत्तम दास टंडन,
- डॉ. बिधान चंद्र रॉय
- 1962: डॉ. राजेंद्र प्रसाद
- 1963: डॉ. जाकिर हुसैन,
- डॉ. पांडुरंग वामन काणे
- 1966: लाल बहादुर शास्त्री
- 1971: इंदिरा गांधी ( Politics & Statesmanship )
- 1975: वी. वी. गिरी
- 1976: के. कामराज
- 1980: मदर टेरेसा ( Social Work & Philosophy )
- 1983: विनोबा भावे ( Social Work & Philosophy )
- 1987: खान अब्दुल गफ्फार खान
- 1988: एम. जी. रामचंद्रन
- 1990: डॉ. भीमराव आंबेडकर, ( Politics & Statesmanship )
- नेल्सन मंडेला
- 1991: राजीव गांधी,
- वल्लभभाई पटेल,
- मोरारजी देसाई
- 1992: मौलाना अबुल कलाम आजाद,
- जेआरडी टाटा,
- सत्यजीत रे ( Arts & Culture )
- 1997: ए.पी.जे. अब्दुल कलाम,
- गुलजारी लाल नंदा,
- अरुणा आसफ अली
- 1998: एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी,
- सी. सुब्रमण्यम,
- जयप्रकाश नारायण ( Social Work & Philosophy )
- 1999: अमर्त्य सेन,
- गोपीनाथ बोरदोलोई,
- रवि शंकर ( Arts & Culture )
- 2001: लता मंगेशकर, ( Arts & Culture )
- उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ां ( Arts & Culture )
- 2008: पंडित भीमसेन जोशी
- 2014: सी.एन.आर. राव, ( Science & Engineering )
- सचिन तेंदुलकर
- 2015: अटल बिहारी वाजपेयी, ( Politics & Statesmanship )
- मदन मोहन मालवीय
- 2019: प्रणब मुखर्जी, ( Politics & Statesmanship )
- भूपेन हजारिका, ( Arts & Culture )
- नानाजी देशमुख ( Social Work & Philosophy )
- 2024: कर्पूरी ठाकुर, ( Social Work & Philosophy )
विशेष तथ्य
- मरणोपरांत सम्मान पाने वाले भी अनेक हैं, जैसे विनोबा भावे, जयप्रकाश नारायण, वल्लभभाई पटेल, मदन मोहन मालवीय आदि।
- विदेशी नागरिक भी सम्मानित हुए, जैसे नेल्सन मंडेला, खान अब्दुल गफ्फार खान।
- सबसे कम उम्र में सचिन तेंदुलकर को मिला भारत रत्न।
भारत रत्न का महत्व और प्रभाव
भारत रत्न भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो किसी भी क्षेत्र में असाधारण और सर्वोच्च सेवा को मान्यता देने के लिए दिया जाता है। इसका महत्व और प्रभाव अद्वितीय है, क्योंकि यह न केवल सम्मानित व्यक्ति की जीवन गाथा का प्रतीक है बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत भी बनता है।
भारत रत्न का महत्व
- यह सम्मान देश के उन महानुभावों को दिया जाता है, जिन्होंने कला, साहित्य, विज्ञान, राजनीति, समाज सेवा, खेल या किसी अन्य क्षेत्र में असाधारण योगदान दिया हो।
- यह पुरस्कार प्राप्तकर्ता को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता और सम्मान दिलाता है।
- भारत रत्न विजेता को सामाजिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक क्षेत्रों में प्रेरक व्यक्तित्व माना जाता है, जो देश के गौरव का प्रतीक हैं।
भारत रत्न का प्रभाव
- यह पदक विजेताओं को जीवन भर राज्य अतिथि का दर्जा, डिप्लोमैटिक पासपोर्ट, और फ्री हवाई यात्रा जैसी विशेष सुविधाएं प्रदान करता है, जो उनके सम्मान को दर्शाता है।
- पुरस्कार पाने वाले व्यक्ति को विशिष्ट सार्वजनिक सम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा मिलती है, जो उनके कार्यों को और प्रेरणादायक बनाती है।
- भारत रत्न पुरस्कार विजेताओं की गतिविधियाँ और कार्य देश में सकारात्मक प्रभाव डालते हैं और वे समाज के लिए आदर्श बनते हैं।
- यह सम्मान आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति, कड़ी मेहनत और महानता की ओर प्रेरित करता है।
भारत रत्न न केवल किसी व्यक्ति की असाधारण सेवा के लिए उच्चतम सम्मान है बल्कि यह राष्ट्रीय और सामाजिक स्तर पर प्रेरणा, सम्मान और पहचान का प्रतीक भी है, जो भारत की प्रगति और समृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
पुरस्कार की संवैधानिक स्थिति
भारत रत्न पुरस्कार की संवैधानिक स्थिति भारतीय संविधान के अनुच्छेद 18(1) के अंतर्गत समझी जाती है, जिसके अनुसार कोई भी उपाधि (चाहे वह सैन्य, शैक्षणिक या अन्य हो) राज्य द्वारा प्रदान नहीं की जाती। भारत रत्न सहित पद्म पुरस्कार उपाधि के रूप में नहीं दिए जाते, बल्कि ये नागरिक सम्मान हैं जो असाधारण सेवा और योगदान के लिए दिए जाते हैं।
संवैधानिक पहलू
- अनुच्छेद 18(1) के कारण भारत रत्न प्राप्तकर्ता इस सम्मान को अपने नाम के आगे या पीछे उपसर्ग या प्रत्यय के रूप में उपयोग नहीं कर सकते; उदाहरण स्वरूप, “भारत रत्न” शब्द को सरकारी दस्तावेज़, नाम, लेटरहेड आदि में पदवी के रूप में नहीं जोड़ा जा सकता।
- भारत सरकार ने इसे एक नागरिक सम्मान के रूप में स्थापित किया है, ताकि यह संविधान की सीमाओं का उल्लंघन न करे।
- इसलिए, यह पुरस्कार सम्मानित व्यक्ति की सेवा और योगदान का प्रतीक है, न कि कोई औपचारिक उपाधि या पदवी।
अन्य विवरण
- भारत रत्न की शुरुआत 2 जनवरी 1954 को हुई थी और यह सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।
- प्रति वर्ष अधिकतम तीन लोगों को यह पुरस्कार दिया जा सकता है।
- यह पुरस्कार किसी भी क्षेत्र में असाधारण योगदान के लिए प्रदान किया जाता है, पात्रता में कोई जाति, लिंग, पद या व्यवसाय का भेद नहीं।
इस प्रकार, भारत रत्न की संवैधानिक स्थिति इस बात को सुनिश्चित करती है कि यह पुरस्कार किसी भी प्रकार की औपचारिक उपाधि नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र के प्रति असाधारण सेवा के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, और संविधान के अनुच्छेद 18(1) के तहत संरक्षित है।
निष्कर्ष
भारत रत्न न केवल भारतीय नागरिकों की असाधारण उपलब्धियों को सम्मानित करता है, बल्कि देश की विविधता और समृद्ध विरासत को भी उजागर करता है। यह पुरस्कार उन मनुष्यों की गाथा है, जो अपने ज्ञान, सेवा, कला व विज्ञान के जरिये भारत के समाज को नई ऊँचाइयों तक पहुंचाते हैं।
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